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हरीतिमा देवालय


पर्यावरण संरक्षण की प्रेरणा देता हरीतिमा देवालयहरिद्वार 18 फरवरी (वार्ता) तीर्थनगरी हरिद्वार का हरीतिमा देवालय ऐसा अनूठा देवालय है, जहां देवी-देवता की मूर्तियों की जगह चारों ओर नाना प्रकार के पेड़-पौधे हैं जो न सिर्फ आगंतुकों को प्रकृति की विलक्षण छटा दिखाते हैं बल्कि धरा को हरा भरा बनाने के लिये प्रेरित भी करते हैं। जलवायु परिवर्तन और प्रदूषण के दुष्प्रभावों की चिंताओं के बीच इस देवालय की हरियाली सुखद अहसास की तरह है।

अखिल विश्व गायत्री परिवार के केंद्र शान्तिकुंज स्थित हरीतिमा देवालय इस मामले में भी अनोखा है कि यहां आने वाले हर व्यक्ति को प्रसाद के रुप में एक पौधा दिया जाता है जिसे तरु प्रसाद नाम दिया गया है। अब तक लाखों पौधों का वितरण किया जा चुका है। यहां लगे अधिकतर वृक्ष और पेड़ पौधे औषधीय गुण वाले हैं। वृक्षों के नाम सहित उनके औषधीय गुण धर्म के बारे में जानकारी दी गयी है ताकि दर्शनार्थी उनसे अवगत हों और लाभ उठा सकें। इस उद्यान में 500 से अधिक प्रकार के पौधे हैं । यहां कई दुर्लभ पौधे भी देखे जा सकते हैं। यहां एक स्थान पर पेड़ पौधों को शिवलिंग का स्वरुप दिया गया है जो यहां आने वालों के लिये आकर्षण का केंद्र है।

गायत्री परिवार प्रमुख प्रणव पण्ड्या ने यूनीवार्ता से बातचीत में कहा कि इस देवालय को गायत्री परिवार के जनक श्रीराम शर्मा आचार्य जी ने 1970 के दशक में बनवाया था। वह कहा करते थे कि “सच्चे मन्दिर वे होते हैं जो जन जागृति के केन्द्र होते हैं।” हरीतिमा देवालय निर्माण के पीछे भी यही उद्देश्य रहा है। यह मन्दिर हरिद्वार आने वाले आगन्तुकों को पर्यावरण संरक्षण का सन्देश देता है। प्रसाद के रूप में औषधीय पौधे भी इस मन्दिर से उपलब्ध कराये जाते हैं जिसे देश भर के लोग ले जाकर अपने यहां लगा रहे और पर्यावरण संरक्षण में अमूल्य योगदान दे रहे हैं।

इस देवालय की एक और विशेषता यह है कि यहां बागवानी की कक्षाएं भी होती हैं। इच्छुक व्यक्तियों को यहां पेड़ पौधे लगाने, उनके रखरखाव, खर पतवार से निपटने आदि की जानकारी दी जाती है।

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Akhandjyoti Nov(1991)