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एक सम्पन्न घर की कन्या बड़ी रूपवती गुणवती थी। विवाह योग्य हुई तो उसने घोषणा की कि जो दौड़ में मुझसे आगे निकल सकेगा उसी के साथ विवाह करूंगी।

अनेकों इच्छुक आये और बाजी हार कर वापस लौटते गये।

एक दिन एक दुर्बल किन्तु चतुर धावक शर्त में सम्मिलित हुआ। दौड़ का मार्ग निर्धारित था। मार्ग के दाहिने भाग में युवती को दौड़ना था। सो युवक ने उस भाग मार्ग पर जहाँ-तहाँ सोने के सिक्के बिखेर...


Akhandjyoti Aug(1987)