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विद्वान कैयट का विवाह तो हो गया था पर पति पत्नी ने मिलकर एक समझौता किया था कि पत्नी सच्चे अर्थों में उनकी सहयोगिनी रहेगी। उनके साहित्य सृजन कार्य में गृहस्थ का जंजाल बढ़ाकर बाधक ना बनेगी।
कैयट सृजन कार्य में निरत रहते। पत्नी आश्रम के समीप से मूँज काट कर रस्सी बंटती और उसे बाजार में बेच कर भोजन वस्त्र का सामान खरीद लाती।
इस प्रकार बीस वर्ष हो गये। पति के...
Akhandjyoti May(1991)