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किसकी मैत्री किन से है, यह पता लगा लेने के उपरान्त उसका चरित्र जानना कुछ भी कठिन नहीं रह जाता।

अपनी प्रसन्नता दूसरे की प्रसन्नता में लीन कर देने का नाम ही प्रेम है।

सौंदर्य पर अपने को निछावर करना वैसा ही है जैसा कि किसी -बंदर का मदारी’ के हाथों पराधीन हो जाना।

प्राचीन काल में सत्य, अहिंसा, ब्रह्मचर्य, तप, योग आदि की अनेक साधनाओं के विधान थे। इस युग में यदि औसत नागरिक...


Akhandjyoti Sep(1986)