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दीनबन्धु ऐंड्रूज में विश्व−मानवता के प्रति प्रेमभावना, माँ की प्राणिमात्र के प्रति करुणा के कारण विकसित हुई थी।

“माँ देखना, मैं कितनी अच्छी चीज लाया हूँ।”

“अरे, यह क्या ले आया। यह तो किसी चिड़िया के अण्डे हैं। मुझे ऐसा लगता है कि तू चिड़िया के तीनों अण्डे उठा लाया है। जब वह अपने घर लौटेगी, तो बहुत रोयेगी बेटा।”

“अच्छा माँ! यह चिड़िया के अण्डे हैं। मुझे क्या मालूम था?” वह बालक लंगड़ाते-लंगड़ाते उस...


Akhandjyoti Oct(1996)