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शिवाजी उन दिनों मुगलों के विरुद्ध छापा मार युद्ध लड़ रहे थे। रात को थके-माँदे वे एक वनवासी बुढ़िया की झोपड़ी में जा पहुँचे और कुछ खाने-पीने की याचना करने लगे। बुढ़िया के घर में कोदों थी, सो उसने प्रेमपूर्वक भात पकाया और पत्तल पर उसने सामने परोस दिया। शिवाजी बहुत भूखे थे। सो सपाटे से भात खाने की आतुरता में उँगलियाँ जला बैठे, मुँह से फूँककर जलन शाँत करनी पड़ी। बुढ़िया ने आँखें फाड़कर उसे देखा और...
Akhandjyoti Nov(1999)