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गायत्री उपासना के संबंध में गीता में भगवान कहते हैं कि यह मार्ग किसी भी स्थिति में नुकसान पहुँचाने वाला नहीं।

योगीराज कृष्ण कहते है-

नेहाभिक्रम नाशोस्ति प्रत्यवायो न विद्यते।

स्वल्पमप्यस्य धर्मस्य त्रायते महतो भयात् ॥

अर्थात्- इस मार्ग पर कदम बढ़ाने वाले का पथ अवरुद्ध नहीं होता। उलटा परिणाम भी नहीं निकलता। थोड़ा सा प्रयत्न करने पर भी भय से त्राण मिलता है।

निष्क्रिय पड़ा रहता है। स्वयं वैज्ञानिक कहते हैं...


Akhandjyoti Oct(1991)