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विनम्रता की शक्ति -
नदी तट पर खड़े हुए शमी-वृक्ष ने बड़े जोर से अट्टहास किया और पास ही पानी में खड़े वेत से कहा—’क्या छोटी-छोटी लहरों के थपेड़े लगते ही झुक जाता है। मुझे देख, किस शान से सिर ऊँचा किये हुए खड़ा हूँ।’ इसी प्रकार वह वृक्ष जब-तब वेत का उपहास उड़ाया करता था। वेत बेचारा केवल इतना ही कह देता था—’वृक्षराज, मैं तो विनम्रता में विश्वास करता हूँ, अभिमान में नहीं।’ शमी वृक्ष उसकी...
Akhandjyoti Oct(1966)