हरिद्वार २२ जून।
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिन चलने वाले गायत्री जयंती महापर्व का शुभारंभ बुधवार को हुआ| प्रथम दिन के पहले सत्र में गौ की महिमा का गान किया गया, तो वहीं दूसरे सत्र में गंगा की महिमा पर विशेष सत्संग हुआ। इस अवसर पर शांतिकुंज रचनात्मक प्रकोष्ठ के समन्यवक श्री केदार प्रसाद दुबे ने च्भारत की पहचान है गंगाज् विषय पर व्याख्यान दिया।
सायंकालीन सभा में बौद्ध धर्म में मानवता पर देसंविवि के कुलसचिव श्री संदीप कुमार ने, ईसाई धर्म में मानवता पर इंजीनियर श्री कालीचरण शर्मा ने, इस्लाम धर्म में मानवता पर श्री अरविन्द कुमार ने, हिन्दु धर्म में मानवता पर श्री केपी दुबे ने विस्तृत जानकारी दी। वहीं इस सभा की अध्यक्षता श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी ने की। श्री उपाध्याय ने वर्तमान समय की मानवता को परिभाषित करते हुए इसे संस्कारित और सुदृढ़ बनाने पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन अरुण खण्डागले ने किया।
इससे पूर्व गायत्री जयंती महापर्व की शुरुआत माँ गायत्री की विशेष आरती एवं ध्यान साधना से हुआ। देश-विदेश से आये हजारों साधकों ने हवन कर वसुधैव कुटुंबकम् की भावना से समृद्ध राष्ट्र की कामना की।
गायत्री तीर्थ शांतिकुंज में तीन दिन चलने वाले गायत्री जयंती महापर्व का शुभारंभ बुधवार को हुआ| प्रथम दिन के पहले सत्र में गौ की महिमा का गान किया गया, तो वहीं दूसरे सत्र में गंगा की महिमा पर विशेष सत्संग हुआ। इस अवसर पर शांतिकुंज रचनात्मक प्रकोष्ठ के समन्यवक श्री केदार प्रसाद दुबे ने च्भारत की पहचान है गंगाज् विषय पर व्याख्यान दिया।
सायंकालीन सभा में बौद्ध धर्म में मानवता पर देसंविवि के कुलसचिव श्री संदीप कुमार ने, ईसाई धर्म में मानवता पर इंजीनियर श्री कालीचरण शर्मा ने, इस्लाम धर्म में मानवता पर श्री अरविन्द कुमार ने, हिन्दु धर्म में मानवता पर श्री केपी दुबे ने विस्तृत जानकारी दी। वहीं इस सभा की अध्यक्षता श्री वीरेश्वर उपाध्याय जी ने की। श्री उपाध्याय ने वर्तमान समय की मानवता को परिभाषित करते हुए इसे संस्कारित और सुदृढ़ बनाने पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन अरुण खण्डागले ने किया।
इससे पूर्व गायत्री जयंती महापर्व की शुरुआत माँ गायत्री की विशेष आरती एवं ध्यान साधना से हुआ। देश-विदेश से आये हजारों साधकों ने हवन कर वसुधैव कुटुंबकम् की भावना से समृद्ध राष्ट्र की कामना की।