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याद रखो, सम्पूर्ण जगत् एक शरीर है। तुम्हारे शरीर में हाथ, नख एवं उँगली की तरह ही एक महत्वपूर्ण अवयव है। यदि हाथ उँगली या नाक शरीर से प्रथक होकर अलग कट जाते हैं तो फिर उनका सारा महत्व ही नष्ट हो जाता है। आत्मा तभी सच्चे अर्थों में आत्मा है, जब वह अपने को परमात्मा का एक अंश अनुभव करे। विराट् विश्व का एक कण ही तो मनुष्य है।

अखिल विश्व की आत्मा से हम अपने...


Akhandjyoti Jan(1972)