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युधिष्ठिर पाँडवों में सबसे बड़े थे। वे सदा अपने से बड़ों पर भरपूर सम्मान करते थे यहाँ तक कि महाभारत युद्ध प्रारंभ होने के पूर्व भी वे युद्ध स्थल में भीष्म पितामह और गुरु द्रोण को प्रणाम करने, आज्ञा लेने गए। उनके आचरण का प्रभाव पाँडवों पर यह पड़ा कि उन्होंने कभी स्वप्न में भी अपने अग्रज युधिष्ठिर की आज्ञा भंग नहीं की। इसी सामंजस्य के कारण वे एक रह सके और अजेय बने रहे।
महाभारत एक...
Akhandjyoti Jun(2001)