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जीवन है क्या ? इस रहस्य का उद्घाटन करने के लिए मर्मज्ञों की परिषद बुलाई गई और पूछा गया कि जिसने जीवन को जैसा पाया, वह अपनी मान्यता व्यक्त करे।
बादल बोला- जीवन एक घुटन भर है। चन्द्रमा ने कहा- आँखमिचौनी। पवन ने बताया-दिशा हीन निरुद्देश्य भटकन। समुद्र ने बताया-विशालता। बूँद बोली- जीवन पतन के अतिरिक्त और कुछ नहीं। अंकुर बोला- अभिनव अवतरण। सरोवर ने कहा- मर्यादा का बन्धन। नदी ने बताया- सतत प्रवाह।
बात बढ़ती...
Akhandjyoti May(1976)