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एक बार जिज्ञासु अग्निवेश ने आचार्य चरक से पूछा- संसार में जो अगणित रोग पाये जाते हैं, उनका कारण क्या है? आचार्य ने उत्तर दिया-व्यक्ति के पास जिस स्तर के पाप जमा होते हैं, उसी के अनुरूप शारीरिक एवं मानसिक व्याधियाँ उत्पन्न होती हैं। व्यक्तिगत-व्याधियाँ ही प्रकृति के सामूहिक दंड ही मनुष्य के सामूहिक पतन के दुष्परिणाम होते हैं।
कर्मफल सिद्धाँत पर ही समस्त संसार का व्यापार चल रहा है। संपूर्ण सृष्टि इस मर्यादा...
Akhandjyoti May(1999)