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ज्ञान, भावना और कर्म तीनों अपने आपको ज्येष्ठ बताया करते थे इसके लिए झगड़ा हो गया। निपटारे के लिए तीनों ब्रह्माजी के पास गए। ब्रह्माजी बोले, “जो आकाश को छू ले वही बड़ा है।” ज्ञान सूर्य तक पहुँचा। आगे उसकी गति न थी। भावना ने छलाँग लगाई, तो आकाश के दूसरे छोर में पहुँच गई, पर नीचे न उतर पाई, वही लटकी रह गई। कर्म ने सीढ़ियां बनानी शुरू की, पर दोपहर तक ही थक गया। ब्रह्मा ने...
Akhandjyoti Apr(2001)